Feb 22 2024 / 3:37 PM

लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया श्वेत पत्र, कहा- यूपीए सरकार में अर्थव्यवस्था संकट में थी

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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ने आज लोकसभा में यूपीए के 2004 से 2014 तक के कार्यकाल में आर्थिक कुप्रबंधन पर एक श्वेत पत्र पेश किया है। इस श्वेतपत्र में यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के बारे में बताया गया है। यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के बारे में वर्तमान केंद्र सरकार की ओर से जारी श्वेत पत्र में बातया गया है कि तत्कालीन सरकार आर्थिक क्रियाकलावों को सुचारु रूप से चलाने में विफल रही। उसकी जगह पर सरकार की ओर से लिए गए निर्णय देश को और पीछे की ओर ले गए।

सरकार ने कहा कि यूपीए सरकार की आर्थिक नीतियां जब वे सत्ता में आए औसत दर्जे की थीं, जैसे-जैसे दशक बीतता गया वे और खराब होती गईं। श्वेत पत्र के अनुसार यूपीए सरकार आर्थिक गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में बुरी तरह विफल रही। इसके बजाय यूपीए सरकार ने ऐसी बाधाएं पैदा कीं जिससे अर्थव्यवस्था रुक गई।

उस सरकार ने वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के सुधारों के विलंबित प्रभावों और अनुकूल वैश्विक परिस्थितियों का लाभ उठाया और दीर्घकालिक आर्थिक परिणामों की अधिक चिंता किए बिना संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों के लिए परिणामी रूप से तेज आर्थिक विकास का शोषण करना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि बुरे ऋणों का पहाड़ खड़ा हो गया। उच्च राजकोषीय घाटा, उच्च चालू खाता घाटा और पांच वर्षों के लिए दो अंकों की मुद्रास्फीति की स्थिति बनी। जिसने कई भारतीयों की जेब पर असर डाला और देश फ्रैजाइल फाइव (पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं) के क्लब में शामिल हो गया।

सरकार ने श्वेत पत्र में बताया कि यूपीए काल के शासक न केवल अर्थव्यवस्था में गतिशीलता लाने में विफल रहे, बल्कि उन्होंने अर्थव्यवस्था को इस तरह लूटा कि हमारे उद्योगपतियों ने रिकॉर्ड पर कहा कि वे भारत के बजाय विदेश में निवेश करना पसंद करेंगे। निवेशकों को भगाना आसान है लेकिन उन्हें वापस जीतना कठिन है। यूपीए सरकार ने यह भी प्रदर्शित किया कि अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की तुलना में उसे नुकसान पहुंचाना आसान है। सरकार ने श्वेत पत्र में कहा कि तत्कालीन यूपीए सरकार को एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी और उन्होंने 10 साल बाद हमें एक कमज़ोर अर्थव्यवस्था दी। अब हमने इसकी जीवंतता बहाल कर दी है।

बता दें कि व्हाइट पेपर एक रिपोर्ट होती है। इसमें सरकार की नीतियों और मुद्दों की चर्चा होती है। कोई भी सरकार व्हाइट पेपर तब लाती है, जब उसे किसी मुद्दे पर एक निष्कर्ष निकालना होता है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा के यूपीए के कार्यकाल को लेकर व्हाइट पेपर लाने से एनडीए को आगामी चुनाव में इसका फायदा मिलेगा। मोदी सरकार को आम चुनाव से पहले कांग्रेस के खिलाफ हमला करने का नया हथियार मिल जाएगा। इससे पहले कांग्रेस ने आज 8 फरवरी को नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ ब्लैक पेपर जारी किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल पर ब्लैक पेपर पेश किया।

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