Nov 27 2022 / 3:47 AM

हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई से अंग्रेजी की गुलामी की मानसिकता खत्म होगी : मुख्यमंत्री श्री चौहान

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केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह 16 अक्टूबर को एम.बी.बी.एस. प्रथम वर्ष की हिन्दी माध्यम की पुस्तकों का करेंगे शुभारम्भ

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की

भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मेडिकल पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की हिन्दी माध्यम की पुस्तकों का शुभारम्भ हिन्दी को स्थापित करने और आत्म-विश्वास पैदा करने का कार्यक्रम है। यह मेडिकल का नहीं भाषा का कार्यक्रम है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारम्भ कर एक नए युग की शुरुआत करेंगे। कार्यक्रम को विश्व का अदभुत और अनोखा कार्यक्रम बनानें के लिए सक्रियता से कार्य करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज निवास कार्यालय में 16 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड में हिन्दी माध्यम से मेडिकल पाठ्यक्रम के शुभारंभ की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव श्री मोहम्मद सुलेमान और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अंग्रेजी भाषा पर निर्भरता की मानसिकता को जड़ से खत्म करने का संदेश जाना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सामाजिक क्रांति हो रही है। हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई की शुरुआत हो रही है। यह अंग्रेजी भाषा की गुलामी की मानसिकता को तोड़ने का कार्यक्रम है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आयुष, उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा विभागों को आपस में समन्वय के साथ इस कार्यक्रम को स्मरणीय बनाने का प्रयास करना चाहिए। विभिन्न स्थानों से बच्चों को भोपाल आने के लिए बसों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आयोजन स्थल पर विभाग की उपलब्धियों से संबंधित प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा सभी कॉलेजों में बच्चों को आमंत्रित कर लाइव प्रसारण दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में सोशल मीडिया में अभियान चलाया जाए। ट्वीट हों। सोशल मीडिया से सीधा प्रसारण किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हिन्दी माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई के संबंध में जागरूकता लाई जाए। अन्य गतिविधियों द्वारा भी हिन्दी माध्यम से उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम के विकास के मूल भाव को लोगों तक पहुँचाया जाए। बताया गया कि कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा और आयुष विभाग के 39 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की भागीदारी अपेक्षित है।

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