Nov 27 2022 / 12:46 AM

उत्पन्ना एकादशी 2022: जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Spread the love

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखना बेहद शुभ फलदायी होता है। दरअसल हर माह में एकादशी दो बार आती है, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। कुल मिलाकर बात करें तो वर्ष में 24 एकादशी आती है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की अराधना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सुख-सौभाग्य का भी वरदान मिलता है। तो ऐसे में हमको बताएंगे कि उत्पन्ना एकादशी का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है।

उत्पन्ना एकादशी शुभ मुहूर्त-

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 19 नवंबर को सुबह 10 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और 20 नवंबर को सुबह 10 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार उत्पन्ना एकादशी का व्रत 20 नवंबर को रखा जाएगा। व्रत का पारण 21 नवंबर को सुबह 6 बजकर 40 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक किया जा सकता है।

उत्पन्ना एकादशी पूजन विधि-

उत्पन्ना एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है और इसके लिए सबसे पहले भगवान विष्णु का गंगाजल से अभिषेक करें और फिर पुष्प व तुलसी दल अर्पित करें। भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी का भी पूजन किया जाता है।

पूजा के बाद भगवान को मीठे का भोग लगाएं और भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। लेकिन ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए। इसलिए एक दिन पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें। उत्पन्ना एकादशी के दिन व्रत करने से भक्तों को हर प्रकार की पाप से मुक्ति मिलती है। इतना ही नहीं, यह व्रत मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी खोलता है।

Chhattisgarh