Feb 24 2024 / 8:13 PM

ऋषि पंचमी 2023: जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और पूजा विधि

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भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी के रूप में मनाया जाता है और हिंदू धर्म में इस दिन विशेष महत्व माना गया है। ऋषि पंचमी व्रत सप्तर्षियों को समर्पित है। इसे गुरु पंचमी भी कहते हैं। मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी के दिन जो सच्चे मन से सप्त ऋषियों का ध्यान कर पूजा-अर्चना करता है, उसके सभी पापों का नाश हो जाता है।

इसके अलावा महिलाओं को माहवारी के समय धार्मिक कार्यों में शामिल होने की मनाही होती है, लेकिन किसी कारण से कोई महिला अगर इस दौरान धार्मिक कार्यों में शामिल हो जाय तो उसे दोष लगता है। ऐसे में ऋषि पंचमी के दिन सप्तर्षियों की पूजा से उसे उसके दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति आती है।

आइए जानते हैं कि ऋषि पंचमी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 19 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 43 से लेकर 20 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार ऋषि पंचमी का व्रत व पूजा 20 सितंबर को होगी। ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों का पूजन किया जाता है। इन 7 ऋषियों में ऋषि कश्यप, ऋषि अत्रि, ऋषि भारद्वाज, ऋषि विश्वमित्र, ऋषि गौतम, ऋषि जमदग्नि और ऋषि वशिष्ठ शामिल हैं। ऋषि पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 1 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में की गई पूजा अधिक फलदायी होती है।

ऋषि पंचमी पूजा विधि
ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें। इस​ दिन गंगा में स्नान करना शुभ माना गया है लेकिन यह संभव न हो तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव का स्वच्छ करें। फिर एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर सप्त ऋषियों की तस्वीर रखें और पूजा शुरू करें।

सबसे पहले सप्त ऋषियों का दूध, दही, घी, शहद और जल से अभिषेक करें। फिर रोली व चावल से तिलक करें और घी का दीपक जलाएं। साथ ही फल-फूल और मिठाई अर्पित करें व भोग लगाएं। हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में की गई गलतियों के लिए माफी मांगे। इसके पश्चात सप्त ऋषियों से अपनी गलतियों की क्षमा मांगे और व्रत कथा पढ़े व सुनाएं।

ऋषि पंचमी व्रत कथा
भविष्य पुराण में ऋषि पंचमी की एक कथा है। इसके अनुसार एक राज्य में उत्तक नाम का ब्राह्मण पति-पत्नी और बेटी के साथ रहता था। बेटी विवाह योग्य हुई तो सुयोग्य वर से विवाह कराया, मगर कुछ समय बाद ही ब्राह्मण के दामाद की मौत हो गई और बेटी मायके आ गई। एक दिन बेटी सो रही थी तो उसकी मां ने देखा कि उसकी बेटी के शरीर में कीड़े लगे हुए हैं।

इस पर ब्राह्मणी ने ब्राह्मण से बेटी की दुर्दशा का कारण पूछा तो उसने बताया कि पूर्व जन्म में इसने माहवारी के समय पूजन सामग्री स्पर्श कर लिया था और न उस जन्म में और न ही इस जन्म में ऋषि पंचमी का व्रत किया। इसके बाद ब्राह्मणी ने बेटी को ऋषि पंचमी का व्रत कराया तो उसके दुख दूर हो गए।

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