Feb 22 2024 / 3:24 PM

खरमास 2023: इस तारीख से शुभ कार्यों पर लगेगी रोक, जानिए कब होगा समापन

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हिंदू धर्म में पूजा पाठ के साथ ही ग्रहों का भी काफी अत्यधिक महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि जब ग्रहों के राजा सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास दोष लग जाता है और इसके साथ ही खरमास की शुरूआत होती है। इस दौरान कोई शुभ कार्य अर्थात शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कार्य नहीं किए जाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि एकादशी से चातुर्मास लग जाता है जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं होते हैं। इसके बाद ही देवउठनी एकादशी आती है जिसमें सभी शुभ कार्यों की शुरूआत होती है। इसके बाद एक बार फिर खरमास लगने पर मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। बता दें कि इस बार खरमास 2024 तक चलने वाला हैं तो जानिए की इसकी शुरूआत कब से हो रही है और कब होगा समापन।

कब से शुरू हो रहा है खरमास

मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से खरमास शुरू होगा। यानी की 16 दिसंबर 2023 खरमास शुरू हो रहे हैं जो एक महीने तक चलेगा। इसका समापन 14 जनवरी 2024 को होगा और इसी दिन सूर्यदेव मकर राशि में गोचर करेंगे।

खरमास में इन मांगलिक कार्यों पर लग जाएगी रोक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। जैसे – विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार आदि इस दौरान नहीं किए जाएंगे क्योंकि खरमास को अशुभ माना गया है।

खरमास में इन बातों का रखें खास ध्यान

खरमास के दौरान कोई भी नई संपत्ति यानि कि जमीन, नए घर आदी की खरीदारी करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे आपके घर-परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान नए व्यापार भी शुरू नहीं करने चाहिए। अगर आप खरमास माह में नया व्यापार शुरू करेंगे तो इससे आपको कारोबार में नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस माह में बेटी-बहु की विदाई भी करने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है।

खरमास में क्या करें

खरमास में सूर्य की गति और प्रकाश दोनों की कम होते हैं और ऐसे में सूर्य को मजबूत करने के लिए रोज सुबह तांबे के लोटे से जल चढ़ाए। इससे सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं। इस माह पौराणों भगवान विष्णु की पूजा का विधान होता है। विष्णु भगवान की पूजा करने से सारे दुख-दर्द दूर होते हैं। खरमास में सूर्य के साथ-साथ गुरु ग्रह का भी प्रभाव कम हो जाता है। इसलिए इस माह में सूर्य देन के साथ-साथ गुरु ग्रह की पूजा करनी चाहिए और सूर्य और देव गुरु बृहस्पति के मंत्रों का जाप करना चाहिए

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