Dec 09 2022 / 9:09 AM

EWS आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- गरीब सवर्णों को मिलता रहेगा 10 फीसदी आरक्षण

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नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के गरीब तबकों को दिए जाने वाले EWS आरक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने आर्थिक आधार पर दिए जाने वाले इस 10 प्रतिशत आरक्षण को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए गरीब सवर्णों के हक में फैसला दिया है।

चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस रविंद्र भट्ट ने इसे गलत बताया। वहीं जस्टिस माहेश्वरी, जस्टिस त्रिवेदी और जस्टिस पारदीवाला ने आरक्षण का पक्ष लिया। उन्होंने कमजोर वर्ग को मिलने वाले 10 फीसदी आरक्षण को सही ठहराया है। 5 जजों की पीठ ने 3-2 से इस कोटे के पक्ष में निर्णय सुनाया।

भारत के चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पांच-न्यायाधीशों की पीठ 103 वें संविधान संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो 10 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए प्रतिशत आरक्षण देता है।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने कहा, कुछ मुद्दे और दृढ़ संकल्प के बिंदु हैं कि क्या यह बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है, दूसरा अगर पिछड़े वर्गों को ईडब्ल्यूएस प्राप्त करने से बाहर करना समानता संहिता और बुनियादी ढांचे का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट ने सात दिनों में 20 से अधिक वकीलों को सुनने के बाद 27 सितंबर को मामले पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था, जबकि अधिकांश याचिकाकर्ताओं ने संशोधन की वैधता को चुनौती दी और अदालत से इसे रद्द करने का आग्रह किया, प्रतिवादी केंद्र सरकार और कुछ राज्यों ने अदालत से आरक्षण के प्रावधान का बचाव करने के लिए कहा था।

यह विधेयक जनवरी, 2019 में निचले और उच्च सदनों दोनों द्वारा पारित किया गया था और तब तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। ईडब्ल्यूएस कोटा एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से अधिक है। बता दें कि 7 नवंबर सीजेआई यूयू ललित का आखिरी कार्य दिवस भी है क्योंकि वह 8 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

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