Sep 27 2022 / 7:38 AM

पीएम मोदी का लाल किले से संबोधन, जानिए भाषण की वो अहम बातें

Spread the love

नई दिल्ली। भारत आज अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के इस अमृत महोत्सव को देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश की जनता को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में रानी लक्ष्मीबाई से लेकर तात्या टोपे और बिरसा मुंडा तक का जिक्र किया। महात्मा गांधी का पुण्य स्मरण किया तो भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, बाबा साहेब आंबेडकर, लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को याद किया तो वीर सावरकर और दीनदयाल उपाध्याय का भी नाम लेना नहीं भूले। उन्होंने स्वामी विवेकानंद से लेकर महर्षि अरविंद और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री के भाषण में जिन दो शब्दों का सबसे ज्यादा बार उल्लेख हुआ, वे शब्द थे सामर्थ्य और संकल्प। उन्होंने कहा कि इस देश की मिट्टी में इनहेरेंट सामर्थ्य है। बड़े-बड़े सोशल साइंस एक्सपर्ट भी यह कल्पना नहीं कर सकते थे कि एक तिरंगे ने पिछले दिनों कैसे देश के अंदर के मौजूद इतने बड़े सामर्थ्य को इस तरह दिखा दिया है। भारत की नारी शक्ति एक नए सामर्थ्य और विश्वास के साथ आगे आ रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम बार-बार शास्त्री जी को याद करते हैं। जय जवान-जय किसान का मंत्र आज भी देश के लिए प्रेरणा है। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जय विज्ञान कहकर उस नारे में एक कड़ी जोड़ दी और देश ने उसे प्राथमिकता भी दी। अब अमृतकाल के लिए एक और अनिवार्यता है। जय अनुसंधान। यानी इनोवेशन। मुझे देश की युवा पीढ़ी पर भरोसा है। आज यूपीआई-भीम इसका उदाहरण है। विश्व में रियल टाइम डिजिटल फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का 40 फीसदी भारत में होता है।

प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से तीन पीड़ाएं जाहिर कीं। ये पीड़ाएं थीं महिलाओं का सम्मान नहीं होना, भ्रष्टाचार बढ़ना और भाई-भतीजावाद होना। प्रधानमंत्री यह कहते हुए भावुक हो गए कि यह शायद लाल किले का विषय नहीं है, लेकिन मेरे भीतर का दर्द मैं कहां कहूंगा? देशवासियों के सामने नहीं कहूंगा तो कहां कहूंगा? किसी न किसी कारण से हमारे अंदर हमारे बोलचाल, व्यवहार और शब्दों में एक ऐसी विकृति आई है कि हम नारी का अपमान करते हैं। क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं? नारी का गौरव राष्ट्र के सपने पूरे करने में बहुत बड़ी पूंजी बनने वाला है। यह सामर्थ्य मैं देख रहा हूं और इसलिए मैं इस बात का आग्रही हूं।

उन्होंने कहा कि इस पच्चीस साल के अमृतकाल में अगर हम समय रहते नहीं चेते तो दो विकृतियां विकराल रूप ले लेंगी। एक है- भ्रष्टाचार। दूसरी है- भाई-भतीजावाद। भारत जैसे लोकतंत्र में, जहां लोग गरीबी से जूझ रहे हैं, वहां हम एक तरफ देखते हैं कि लोगों के पास रहने की जगह नहीं है, दूसरी तरफ वे लोग हैं, जिनके पास चोरी किया हुआ माल रखने की जगह नहीं है। भाई-भतीजावाद भी सिर्फ राजनीति के क्षेत्र में नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी एक समस्या बना हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहला प्रण है कि अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चलेगा। यह बड़ा संकल्प है- विकसित भारत, उससे कुछ कम नहीं। दूसरा प्रण है कि किसी भी कोने में हमारे मन और आदतों के भीतर गुलामी का एक भी अंश अब भी मौजूद है तो उसे किसी भी हाल में रहने नहीं देना है। तीसरा प्रण है कि हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए। इसी विरासत ने हमें स्वर्णकाल दिया, इसी विरासत ने समयानुकूल हमें बदलाव के लिए प्रेरित किया। इसलिए इस विरासत के प्रति हमें गर्व होना चाहिए। चौथा प्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह है- एकता और एकजुटता। 130 करोड़ देशवासियों में एकता हो, न कोई अपना, न कोई पराया। पांचवां प्रण है कि नागरिकों का कर्तव्य, जिससे प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री भी बाहर नहीं होता।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में तीन मौकों पर महिला सशक्तीकरण की बात कही। उन्होंने कहा कि घर में भी एकता की नींव तभी रखी जाती है, जब बेटा-बेटी एकसमान हों। लैंगिक समानता एकता की पहली सीढ़ी है। जब भी पारिवारिक तनाव की बात होती है तो भारत की पारिवारिक व्यवस्था की याद आती है। संयुक्त परिवार की पूंजी हमारी माताओं-बहनों के त्याग के कारण बनी हुई है। यह हमारी विरासत है।

उन्होंने कहा कि भारत की नारी शक्ति एक नए सामर्थ्य और विश्वास के साथ आगे आ रही है। आने वाले 25 साल में कई गुना योगदान मैं नारी शक्ति, माताओं-बहनों का देख रहा हूं। यह सारे हिसाब-किताब से ऊपर और सारे मानदंडों से अतिरिक्त है। हम इस पर जितना ध्यान देंगे, जितने अवसर बेटियों को देंगे, वे हमें बहुत कुछ लौटाकर देंगी। वे देश को ऊंचाई पर ले जाएंगी। इस अमृतकाल में जो सपने पूरे करने में मेहनत लगने वाली है, उसमें नारी शक्ति जुड़ जाएगी तो मेहनत कम होगी और समय सीमा कम हो जाएगी।

यह नौवां मौका था, जब प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया। हर मौके पर प्रधानमंत्री के साफे का रंग बदलता रहा। इस बार उन्होंने तिरंगे की धारियों वाला साफा पहना था। यह पीछे की ओर से लंबा था। पिछली बार वह केसरिया साफे में नजर आए थे। इससे पहले वह इस मौके पर पीले, गुलाबी और सुनहरे रंग के साफे भी पहन चुके हैं।

Chhattisgarh