Feb 22 2024 / 4:06 PM

अमृत कलश यात्रा के समापन समारोह में बोले पीएम मोदी- इस मिट्टी में वो चेतना, जिसने देश को अनादिकाल से बचा कर रखा

Spread the love

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरी माटी मेरा देश-अमृत कलश यात्रा के समापन समारोह में भाग लिया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने एक डिजिटल प्रदर्शनी देखी। उन्होंने युवाओं के लिए मेरा युवा भारत (एमवाई भारत) मंच की शुरुआत की और अमृत महोत्सव स्मारक एवं अमृत वाटिका का वर्चुअली शिलान्यास किया।

पीएम मोदी ने समापन समारोह में देश को संबोधित करते हुए कहा कि आज लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर कर्तव्य पथ एक ऐतिहासिक महायज्ञ का साक्षी बन रहा है। 12 मार्च 2021 को गांधी जी की प्ररेणा से साबरमती आश्रम से शुरू हुआ आजादी का अमृत महोत्सव अब 31 अक्तूबर 2023 आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर समापन का पल है।

उन्होंने कहा कि आज ये हुजूम एक नया इतिहास बन गया। जैसे दांडी यात्रा शुरू होने के बाद देशवासी उससे जुड़ते गए, वैसे ही आजादी के अमृत महोत्सव ने जनभागीदारी का ऐसा हुजूम देखा कि नया इतिहास बन गया। 75 साल की ये यात्रा समृद्ध भारत के सपने को साकार करने वाला कालखंड बन रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज मेरा युवा भारत संगठन, यानी एमवाई भारत की नींव रखी गई है। 21वीं सदी में राष्ट्र निर्माण के लिए मेरा युवा भारत संगठन, बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है। भारत के युवा कैसे संगठित होकर हर लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ‘मेरी माटी मेरा देश’ अभियान है। ‘मेरी माटी, मेरा देश’ अभियान में गांव-गांव, गली-गली से देश के युवा जुड़े।

पीएम मोदी ने कहा कि इस महोत्सव का मेरी माटी मेरा देश अभियान के साथ समापन हो रहा है। आज आजादी का अमृत महोत्सव एक याद के लिए स्मारक का शिलान्यास भी हुआ है। ये स्मारक आने वाली पीढ़ियों को हमेशा इस ऐतिहासिक आयोजन की याद दिलाएगा।

पीएम मोदी ने कहा कि बड़ी-बड़ी महान सभ्यताएं समाप्त हो गईं, लेकिन भारत की मिट्टी में वो चेतना है जिसने इस राष्ट्र को अनादिकाल से आज तक बचा कर रखा है। ये वो माटी है, जो देश के कोने-कोने से, आत्मीयता और अध्यात्म, हर प्रकार से हमारी आत्मा को जोड़ती है। किसान हों, वीर जवान हों, किसका खून-पसीना इसमें मिला है।

पीएम मोदी ने कहा कि इसी माटी के लिए कहा गया है- चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है। माटी स्वरूप इस चंदन को अपने सिर माथे पर लगाने के लिए हमसब लालायित रहते हैं। जो माटी का कर्ज चुका दे, वही जिंदगानी है! जो अमृत कलश यहां आए हैं, इनके भीतर मिट्टी के हर कण अनमोल हैं।

उन्होंने कहा कि देश के हर घर-आंगन से जो मिट्टी यहां पहुंची है, वो हमें कर्तव्य भाव की याद दिलाती रहेगी। ये मिट्टी, हमें विकसित भारत के अपने संकल्प की सिद्धि के लिए और अधिक परिश्रम के लिए प्रेरित करेगी। आज हम संकल्प लेते हैं- जन-जन को हम जा के जगाएंगे, सौगंध मुझे इस मिट्टी की, हम भारत भव्य बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि देशभर से जो पौधे आए हैं, उनसे यहां एक अमृत वाटिका बनाई जा रही है। इसका शिलान्यास भी अभी यहां हुआ है। ये ‘अमृत वाटिका’ आने वाली पीढ़ियों को ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की प्रेरणा देगी।

Chhattisgarh