Feb 06 2023 / 2:55 PM

इजराइली फिल्म मेकर नादव लापिड ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ को बताया अश्लील और प्रोपेगेंडा फिल्म

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नई दिल्ली। बॉलीवुड की मचऑवेटेड फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को लेकर विवाद जारी है। दरअसल, 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (आईएफएफआई) के जूरी हेड नादव लापिड ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म को अश्लील और प्रोपेगेंडा पर आधारित फिल्म कह डाला।

लापिड ने कहा कि यह फिल्म किसी भी तरह इस महान फिल्म समारोह के समापन समारोह के लिए उपयुक्त नहीं थी। उन्होंने आगे कहा कि हम सभी 15वीं फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ से परेशान और स्तब्ध थे। यह हमें एक प्रचार, अश्लील फिल्म की तरह लगा, जो इतने प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के कलात्मक प्रतिस्पर्धी वर्ग के लिए अनुपयुक्त है। फेस्टिव में कुल 15 फिल्में दिखाई गई थीं जिनमें से 14 (अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों) में सिनेमाई गुणवत्ता थी। परन्तु यह फिल्म पूरी तरह से प्रोपेगेंडा आधारित वल्गर मूवी है। लापिड यही नहीं रुके, उन्होंने कहा कि इस फिल्म को देखकर आईएफएफआई परेशान है।

हालांकि बाद में विवाद बढ़ने पर बाकी सभी ज्यूरी मेम्बर्स ने इसे लापिड की निजी राय बताते हुए किनारा कर लिया था। जूरी के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इस मंच पर आपके साथ इन भावनाओं को खुलकर साझा करने में मैं पूरी तरह से सहज महसूस कर रहा हूं। चूंकि, महोत्सव की भावना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण चर्चा को भी स्वीकार कर सकती है, जो कला और जीवन के लिए आवश्यक है।

लापिड की विवादित टिप्पणी पर बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर ने कड़ा विरोध जताया। अनुपम खेर ने कहा, यह सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म के लिए दुनियाभर के लगभग 500 लोगों का साक्षात्कार लिया। बढ़ती हिंसा के बाद 19 जनवरी, 1990 की रात पांच लाख कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी में अपने घरों और यादों को छोड़ना पड़ा। एक कश्मीरी हिंदू के रूप में मैं त्रासदी के साथ रहता था। लेकिन कोई भी इस त्रासदी को पहचान नहीं रहा था। दुनिया इस त्रासदी को छिपाने की कोशिश कर रही थी।

इस संबंध में अनुपम खेर ने एक ट्वीट भी किया। ट्वीट में उन्होंने जर्मनी द्वारा किए गए यहूदी नरसंहार पर आधारित फिल्म की कुछ तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा, झूट का क़द कितना भी ऊँचा क्यों ना हो, सत्य के मुक़ाबले में हमेशा छोटा ही होता है।

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