Dec 11 2023 / 11:47 PM

चंद्रयान-3 ने भरी उड़ान, भारत ने अंतरिक्ष में लगाई बड़ी छलांग

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नई दिल्ली। भारत ने आज अपना तीसरा मून मिशन ‘चंद्रयान-3’ लॉन्च कर दिया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर चंद्रयान-3 को लॉन्च किया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का ये बेहद खास मिशन 615 करोड़ की लागत में तैयार हुआ है।

लॉन्च होने के बाद करीब 42 दिन बाद यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। बता दें कि अगर चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग कर लेता है तो भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।

इसके साथ ही चंद्रयान-3 के चांद की सतह पर उतरते ही भारत दुनिया के चार देशों में शामिल हो जाएगा। इससे पहले अब तक अमेरिका, रूस और चीन ही चांद की सतह पर अपना लैंडर उतार चुके हैं। इससे पहले सितंबर 2019 में भी इसरो ने चंद्रयान-2 के जरिए चांद के दक्षिणी धुर्व पर उतरने की कोशिश की थी, लेकिन उस वक्त लैंडर की हार्ड लैंडिंग होने से मिशन पूरा नहीं हो सका था। इसरो ने अपनी पिछली गलतियों से काफी सबक लिया है। इस बार कई सारे बदलाव के बाद चंद्रयान-3 को लॉन्च किया गया।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव भारते के साथ ही अमेरिका और चीन की नजरे हैं। कुछ साल पहले ही चीन ने दक्षिणी ध्रुव से कुछ ही दूरी पर अपने लैंडर की लैंडिंग कराई थी। वहीं, अमेरिका भी 2024 में दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में इसरो के चंद्रयान-3 मिशन पर पूरी दुनिया की नजरें हैं। अनुमान जताया जा रहा है कि 23 या 24 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की सतह पर लैंड कर लेगा।

बता दें कि चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं है, बल्कि एक प्रोपल्शन मॉड्यूल है। जो किसी संचार उपग्रह की तरह काम करेगा। ISRO ने चंद्रयान-3 के शुरुआती बजट के लिए 600 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया था, लेकिन यह मिशन मात्र 615 करोड़ रुपए में पूरा हो जाएगा। चंद्रयान-3 का बजट रूस, चीन, अमेरिका के मून मिशन से बेहद कम है। अगर गणना की जाए तो मून मिशन पर प्रति किलोमीटर का खर्च मात्र 16000 रुपये हैं।

पृथ्वी से चांद की दूरी 3 लाख 84 हजार 403 किमी है। बताया जा रहा है कि चंद्रयान 3 का कुल बजट 615 करोड़ रुपये है। इससे समझा जा सकता है कि इस मिशन की लागत प्रति किलोमीटर 6000 रुपये हैं। ये रकम रूस, चीन और अमेरिका के लैंडर मिशन से बेहद कम है।

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