May 24 2022 / 5:54 AM

रूस की यूक्रेन पर बमबारी जारी, बेनतीजा रही तीसरे दौर की बैठक

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध का आज 16वां दिन है। पिछले 15 दिनों से जंग लड़ रहे रूस और यूक्रेन के बीच अब बातचीत का सिलसिला भी शुरू गया है। तुर्की के एंटाल्या शहर में आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा के बीच त्रिपक्षीय मुलाकात हुई। कयास लगाए जा रहे थे कि इस बातचीत में युद्ध विराम को लेकर कोई निर्णय लिया जा सकता है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बल्कि, दोनों विदेश मंत्रियों की बातचीत बेनतीजा रही।

बैठक के बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ समझौता करना बेहद मुश्किल है। बातचीत के दौरान सीजफायर पर कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने आगे कहा कि रूस की हर मांग को पूरा करने का हमारा कोई इरादा नहीं है।

दोनों की मुलाकात की एक ऑफिशियल फोटो भी सोशल मीडिया पर जारी की गई। फोटो में दोनों के बीच दूरियां साफ नजर आईं। फोटो में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव बैठक के दौरान 2 सलाहकारों से घिरे दिखे। वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा भी अपने अधिकारियों के साथ वहां मौजूद थे।

खास बात यह है कि तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुट कावुसोग्लू भी बैठक में मौजूद थे। कावुसोग्लू होटल के कॉन्फ्रेंस रूम में यू शेप वाली टेबल के एक कोने में बैठे हुए थे। यह दोनों देशों के बीच पिछले 15 दिनों में पहली उच्च स्तरीय बातचीत थी। कावुसोग्लू ने कहा है कि बैठक का आयोजन तुर्की के राष्ट्रपति की सहमति के बाद किया गया। इसका उद्देश्य रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के बीच बैठक का रास्ता बनाना था। 

बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 15 दिनों से युद्ध जारी है। रूस ने इन 15 दिनों में यूक्रेन पर जबरदस्त बमबारी की है, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई है। रूस के इस हमले के बाद अमेरिका समेत ज्यादातर यूरोपीय देशों ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। ऐसे में नाटो का सदस्य होने के चलते यूरोपीय देश तुर्की पर भी रूस के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ रहा है।

इसलिए, तुर्की चाहता है कि वह रूस और यूक्रेन के मध्यस्थता कराने में माध्यम का काम करे। इसलिए तुर्की के शहर एंटाल्या में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने बैठक की। बता दें कि नाटो के सदस्य देश तुर्की के रूस से भी अच्छे संबंध हैं। इसलिए वह दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत की तरह वह भी खुद को निष्पक्ष दिखाना चाहता है।

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