Jul 02 2022 / 2:14 PM

होलिका दहन 2022: जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि





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फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। शास्त्रों में फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व काफी ज्यादा होता है। माना जाता है कि होलिका की अग्नि की पूजा करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इस साल होलिका दहन का त्योहार 17 मार्च 2022 को मनाया जाएगा।

होलिका दहन शुभ मुहूर्त-

फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 17 मार्च को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट से शुरु होगी, जिसका समापन 18 मार्च को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर होगा। भद्रा प्रारंभ 17 मार्च को दोपहर 01 बजकर 02 मिनट से और समापन 17 मार्च को देर रात 12 बजकर 57 मिनट पर होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 17 मार्च को रात 12 बजकर 57 मिनट के बाद से होगा।

होलिका दहन पूजन सामग्री-

एक कटोरी पानी, गाय के गोबर से बनी माला, रोली, अक्षत, अगरबत्ती और धूप, फूल, कच्चा सूती धागा, हल्दी का टुकड़ा, मूंग की साबुत दाल, बताशा, गुलाल पाउडर, नारियल, नया अनाज (गेहूं)।

होलिका दहन पूजा विधि-

सभी सामग्रियों को एक प्लेट में रख लें। इसके बाद जिस जगह पर होलिका की पूजा करनी है उस स्थान को साफ कर लें। पूजा करते समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। फिर गाय के गोबर से होलिका और प्रह्लाद की मूर्ति बनाएं। इसके बाद होलिका पूजन में प्लेट में रखी सभी चीजों को अर्पित करें। इसमें मिठाइयां और फल भी अर्पित करें। इसके बाद भगवान नरसिंह की पूजा करें। अंत में होलिका की 7 बार परिक्रमा करें।

होलिका दहन पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, हिरण्यकशिपु का ज्येष्ठ पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता के लाख कहने के बावजूद प्रह्लाद विष्णु की भक्ति करता रहा। दैत्य पुत्र होने के बावजूद नारद मुनि की शिक्षा के परिणामस्वरूप प्रह्लाद महान नारायण भक्त बना। असुराधिपति हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने की भी कई बार कोशिश की परन्तु भगवान नारायण स्वयं उसकी रक्षा करते रहे और उसका बाल भी बांका नहीं हुआ।

असुर राजा की बहन होलिका को भगवान शंकर से ऐसी चादर मिली थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। होलिका उस चादर को ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। दैवयोग से वह चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गई, जिससे प्रह्लाद की जान बच गई और होलिका जल गई। इस प्रकार हिन्दुओं के कई अन्य पर्वों की भाँति होलिका-दहन भी बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।

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