May 26 2022 / 10:30 AM

महावीर जयंती 2022: जानें तिथि और इसका महत्व

महावीर जयंती जैन धर्म की सबसे मौलिक मान्यताओं में से एक है। इसलिए जैन धर्म को मानने वालों के लिए यह दिन बहुत महत्व रखता है क्योंकि वे 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म का जश्न मनाते हैं। जैन लोग इस दिन को जन्म कल्याणक भी कहते हैं।

जैन शास्त्र और हिंदू पंचांग कैलेंडर के अनुसार भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में चैत्र महीने में चंद्रमा के शुक्ल पक्ष के 13 वें दिन हुआ था। इसलिए हर साल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भगवान महावीर की मूर्ति के साथ रथ यात्रा का एक दिव्य जुलूस निकाला जाता है।

बाद में उसी दिन भक्त मंदिर में प्रार्थना करते हैं और धार्मिक भजन गाते हैं। जैनियों के लिए यह दिन दान का प्रतीक है। साथ ही यह लोगों को जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करती है और अहिंसा को बढ़ावा देती है।

महावीर जयंती 14 अप्रैल 2022 को मनाई जाएगी। दुनिया भर में जैन धर्म के अनुयायी इस दिन को अंतिम तीर्थंकर, भगवान महावीर की शिक्षाओं और जीवन जश्न मनाएंगे।

तिथि-

महावीर जयंती तिथि: 14 अप्रैल, 2022 (गुरुवार)
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 अप्रैल, 2022, सुबह 04 बजकर 49 मिनट
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 अप्रैल, 2022, सुबह 03 बजकर 55 मिनट

महत्व-

महावीर जयंती का जैन और हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हिंदू धर्म के अनुसार राजा सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के राज्यकाल के समय इनका जन्म हुआ था। आज के समय में ये जगह बिहार के नाम से जानी जाती है। जिसका स्वप्न रानी त्रिशला को 14 दिन पश्चात आया था। इस स्वप्न में ये भविष्यवाणी हुई थी कि जन्म लेने वाला यह बालक भविष्य में तीर्थंकर बनकर आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त कर समाज को धर्म का मार्ग दिखाएगा।

महावीर भगवान सभी प्राणियों को समान दृष्टि से देखते थे। भगवान महावीर ने 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त किया था। इस तपस्या के दौरान इन्होंने कई समस्याओं और कष्टों का सामना किया था। कोलकाता के जैन मंदिर और बिहार के पावापुरी में स्थित मंदिर में इस दिन बड़े स्तर पर पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन भक्त पूरी आस्था और श्रद्धा से भगवान महावीर जी की आराधना करते हैं और पूजा का आयोजन करते हैं।

महावीर जयंती क्या है-

महावीर जयंती का दिवस महावीर स्वामी का जन्मदिन मानकर मनाया जाता है। महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व में हुआ था। इनको जैन धर्म का संस्थापक माना जाता है और जैन धर्म के ग्रंथों में इनके द्वारा दी गई शिक्षाओं का वर्णन विस्तार से देखने को मिलता है। जैन धर्म में माना जाता है कि ये धर्म सभी धर्मों में सबसे प्राचीन धर्म है। भगवान महावीर हिंसा के बिल्कुल विरुद्ध थे।

महावीर का पहला सिद्धांत यही था कि किसी को बिना कष्ट दिए अहिंसा का मार्ग अपनाना चाहिए। महावीर जी ने अपने जीवनकाल में लोगों को हमेशा सत्य का साथ देने के लिए लिए लोगों को प्रेरित करते थे। महावीर जयंती अस्तेय और ब्रह्मचर्य के सिद्धांत का ज्ञान देने वाला दिवस है।

हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह में आने वाले शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को यह दिन मनाया जाता है। सनातन धर्म में माना जाता है कि इसी दिन उनका जन्म हुआ था। इसे भगवान महावीर का जन्म मानकर मनाया जाता है। इस दिन महावीर जी को प्रसन्न करने के लिए शोभायात्रा निकाली जाती है और इनका पूजन किया जाता है।

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