Jul 02 2022 / 1:46 PM

राज्यपाल सुश्री उइके गुरु तेग बहादुर के 400 वें प्रकाश पर्व समारोह में हुईं शामिल





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रायपुर। आज रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित सिख समाज के नौंवें गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके शामिल हुईं। उन्होंने समारोह में गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेका और देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री उइके ने सिख समाज को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गुरू तेग बहादुर ने आजीवन धर्म एवं मर्यादा की रक्षा में तत्पर रहे। गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान देश की संस्कृति की गरिमा एवं उसके सम्मान की रक्षा के लिए हमेशा प्रेरित किया है और आने वाली पीढ़ीयों को भी प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि विश्व भर में सिख समाज गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चल कर समाज सेवा का पुनित कार्य कर रहा है। सिख समाज को उनके इस सेवा और त्याग के लिए धन्यवाद दिया।

सुश्री उइके ने कहा कि जब-जब राष्ट्र को जरूरत पड़ी तो उसकी रक्षा में गुरुओं ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और शहादत से भी पीछे नहीं हटे। गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की विशिष्टता है और इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए हमारे देश ने गुरुओं के मार्गदर्शन में निरंतर प्रगति की है। धर्म गुरुओं के सामर्थ्य, त्याग, सेवा, बलिदान के विचारों ने न केवल अनुयायियों को अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित किया है बल्कि समाज को भी नई दिशा दी है । उन्होंने कहा कि औरंगजेब की क्रूरता के आगे गुरु तेग बहादुर दीवार की तरह खड़े रहे। ऐसे महान बलिदानी और विचारक गुरु तेग बहादुर की वीरता को नमन करती हूँ।

उन्होंने दुनिया भर में फैले सिख समाज को कोरेाना महामारी के कठिन परिस्थिति में दिए योगदान के लिए धन्यवाद दिया। सिख समाज सदैव हमें स्मरण कराता है कि मानव सेवा सर्वाेपरि है और इस कार्य में समाज के सभी धर्मों,जातियों के लोगों को बिना किसी भेदभाव केे हमेशा तत्परता से संलग्न रहना चाहिए।

इस अवसर पर सिख समाज के महिलाओं ने राज्यपाल सुश्री उइके को शाल एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। इस समारोह में छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री महेंद्र छाबड़ा, खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री गुरप्रीत सिंह बाबरा, निरंजन खनूजा,श्री सुरेंद्र छाबड़ा, डी.एस.भामरा, अमरजीत सिंह चन्नी, सुरेंद्र कौर छाबड़ा, चरणजीत कौर छाबड़ा, सुरेंद्र कौर जुनेजा, सुरेंद्र कौर चावला एवं सिख समाज के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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