Jul 02 2022 / 1:17 AM

सुप्रीम कोर्ट ने ‘वन रैंक वन पेंशन योजना’ की नीति को सही ठहराया





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नई दिल्ली। सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के लिए लागू ‘वन रैंक वन पेंशन योजना’ की मौजूदा नीति को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार की नीति को सही ठहराया है और कहा है कि इस नीति में कोई संवैधानिक कमी नहीं है, इसे बरकरार रखना चाहिए।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस नीति में पांच साल में पेंशन की समीक्षा का प्रावधान है। इसलिए सरकार एक जुलाई 2019 की तारीख से पेंशन की समीक्षा करे और तीन महीने में बकाया राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार के इस फैसले में दखल देने से भी इनकार किया है।

बता दें कि पूर्व सैनिकों की एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस नीति से वन-रैंक वन-पेंशन का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। इसकी हर साल समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन इसमें पांच साल में समीक्षा का प्रावधान है। अलग-अलग समय पर रिटायर हुए लोगों को अब भी अलग पेंशन मिल रही है। याचिका में कहा गया था कि ओआरओपी का क्रियान्वयन दोषपूर्ण है।

इस मामले में कोर्ट ने आज सुनवाई हुई जिसमें कहा गया है कि ओआरओपी के सिद्धांतों और 7 नवंबर 2015 को जारी अधिसूचना में कोई संवैधानिक दोष नहीं लगता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया है।

केंद्र सरकार ने 7 नवंबर 2011 को एक आदेश जारी कर वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने का फैसला लिया था, लेकिन इसे 2015 से पहले लागू नहीं किया जा सका था। इस योजना के दायरे में 30 जून 2014 तक सेवानिवृत्त हुए सैन्यबल कर्मी आते हैं।

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