May 26 2022 / 9:49 AM

सत्ता को आईना दिखाना राष्ट्रधर्म है, देशद्रोह नहीं: कांग्रेस

नई दिल्ली। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान अस्तित्व में आया देशद्रोह कानून, क्या अब आलोचकों का गला नहीं घोटेगा। कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद यह बात कही है। पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया, आवाज उठाने के राष्ट्रधर्म को किसने राष्ट्रद्रोह बताया है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, अंग्रेजों द्वारा 1890 में शुरू किए गए राजद्रोह कानून के अब कोई मायने नहीं रह गए हैं।

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, सत्ता के हुकमरानों के खिलाफ आवाज उठाने के काले कानून को खत्म करने का वादा किसने किया। आवाज उठाने के राष्ट्रधर्म को देशद्रोह कौन बता रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह कानून के मामले में एतिहासिक निर्णय दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत का संदेश साफ है। सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा, सत्ता के सिंहासन पर बैठ कर आवाज कुचलने वाले निरंकुश शासक जान लें कि स्वयंभू राजा और बेलगाम सरकारों की जनविरोधी नीतियों की आलोचना का गला नहीं घोंट सकते। सत्ता को आईना दिखाना राष्ट्रधर्म है, देशद्रोह नहीं।

इससे पहले एनसीपी नेता शरद पवार ने इस कानून बाबत कहा, यह कानून विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। इस काले कानून के तहत, सरकार किसी के भी खिलाफ आरोप लगा सकती है। केस दर्ज होते ही लोगों को जेल भेजा जा सकता है। पवार ने कहा, जब अंग्रेज ही चले गए हैं, तो उनके कानून का क्या फायदा। हैरानी की बात है कि वह कानून आज भी बना हुआ है। आज देश के पास अपनी ताकत है। नागरिकों को अपने सवालों के लिए सरकार का विरोध करने का अधिकार है। इस कानून को अब बदला जाना चाहिए। देशद्रोह के कानून को लगातार बदलने की जरूरत है। केंद्र सरकार, पहले इस राजद्रोह कानून को निरस्त नहीं करना चाहती थी। सुप्रीम कोर्ट का रुख भांपने के बाद केंद्र सरकार ने कहा, वह इस कानून पर पुनर्विचार करेगी। यह बदलाव सकारात्मक है। इस कानून के सख्त प्रावधानों को बदलने की जरूरत है, इस पर संसद में भी चर्चा हो चुकी है।

बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने अपने फैसले में कहा, देशद्रोह कानून पर तब तक रोक लगी रहे, जब तक इसकी समीक्षा नहीं हो जाती। इस दौरान देशद्रोह की धारा 124-A के अंतर्गत कोई नया केस दर्ज नहीं किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने 124-A के तहत दर्ज मौजूदा सभी मामलों पर रोक लगा दी है। जो लोग इस कानून के तहत जेल में बंद हैं, वे अपनी जमानत के लिए अदालत जा सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा है कि केंद्र सरकार, देशद्रोह कानून पर जल्द पुनर्विचार करेगी।

Chhattisgarh