May 24 2022 / 4:26 AM

उपचुनाव 2022: बंगाल में शत्रुघ्न सिन्हा और बाबुल सुप्रियो की जीत, बिहार में चला आरजेडी का जादू

नई दिल्ली। देश के एक लोकसभा सीट और चार विधानसभी सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे आ गए हैं। बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट पर टीएमसी के शत्रुघ्न सिन्हा, जबकि बालीगंज विधानसभा सीट पर टीएमसी के ही बाबुल सुप्रियो ने बड़ी जीत हासिल की है। उधर, बिहार के बोचहां विधानसभा सीट पर राजद के अमर पासवान विजयी हुए हैं। बिहार में आरजेडी ने बोचहां पर जीत हासिल कर ली है। आरजेडी कैंडिडेट ने बीजेपी के प्रतिद्वंदी को 35 हजार वोटों के फासले से मात दी है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल को 2 लाख 64 हजार 913 वोट से हराया। ये सीट पिछले साल बाबुल सुप्रियो के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। सुप्रियो भारतीय जनता पार्टी छोड़कर टीएमसी में शामिल हो गए थे। बालीगंज विधानसभा सीट से बाबुल सुप्रियो ने बीजेपी की केया घोष और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सायरा शाह को हराया। यह सीट पर पूर्व विधायक और राज्य के मंत्री रहे सुब्रत मुखर्जी के निधन के बाद खाली हुई थी।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर नॉर्थ सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार जयश्री जाधव ‌ने बीजेपी के सत्यजीत कदम को करीब 19000 वोटों से करारी शिकस्त दी। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस कैंडिडेट आगे चल रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में करीब 78 फीसदी मतदान हुआ। सत्तारूढ़ कांग्रेस खैरागढ़ के लिए एक नया जिला बनाने के अपने वादे पर भरोसा कर रही है। पिछले साल नवंबर में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के विधायक देवव्रत सिंह के निधन के कारण उपचुनाव कराना पड़ा था।

देवव्रत सिंह, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी द्वारा स्थापित पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस छोड़ दी थी, खैरागढ़ शाही परिवार के वंशज थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि 16 अप्रैल को कांग्रेस प्रत्याशी यशोदा वर्मा खैरागढ़ से विधायक बनेंगी और 17 अप्रैल को खैरागढ़-चुईखदान-गंडई नाम का नया जिला हकीकत बनेगा।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित बोचाहन विधानसभा सीट, विधायक मुसाफिर पासवान की मृत्यु के बाद खाली हो गई, जिन्होंने बॉलीवुड सेट डिजाइनर से राजनेता बने मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर जीत हासिल की थी। साहनी (जो शुरू में पूर्व विधायक के बेटे अमर पासवान को मैदान में उतारना चाहते थे) ने हाल ही में अपना मंत्री पद खो दिया और बाद में अपने संभावित उम्मीदवार का विश्वास खो दिया।

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