Jul 02 2022 / 1:39 AM

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में नहीं हुआ फैसला, 26 मई को अगली सुनवाई





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नई दिल्ली। ज्ञानवापी मस्जिद का मामले को लेकर आज यानी की मंगलवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई है। दोनों ही पक्षों की ओर अदालत में पहुंचे थे। इस दौरान जैसे ही दोनों ही पक्षों के लोग अपनी दलीलें पेश करने के लिए जा रहे थे, तो कोर्ट ने सुनवाई क अगली तारीख तय कर दी है। अब ज्ञानवापी मसले को लेकर आगामी 26 मई को तय की गई है। ऐसी स्थिति में हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी रहेगी कि कोर्ट का क्या कुछ फैसला आता है।

हालांकि, माना जा रहा था कि आज कोर्ट की ओर से कोई फैसला आ सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, बल्कि कोर्ट की तरफ से सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी गई है। बता दें जिला अदालत विश्वेश कुमार की अदालत में इस मसले को लेकर सुनवाई हो रही है। अब माना जा रहा है कि आगामी 26 मई को मुस्लिम पक्ष की ओर से 7/11 पर बहस देखने को मिलेगी।

हालांकि, आज कोर्ट में इस मसले को लेकर कोई भी सुनवाई नहीं हुई। फिलहाल दोनों ही पक्षों की ओर से मेंटनेब्लिटी पर सुनवाई होनी है। बता दें कि कोर्ट में वादी-प्रतिवादी समेत अन्य पक्षों के लोग कोर्ट में मौजूद थे। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में दोनों ही पक्षों को कमीशन की सर्वे रिपोर्ट सौंपे जाएंगे। इस दौरन कोर्ट में हिंदू पक्षों की ओर से हर-हर महादेव के नारे भी लगे।

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। जब दोनों ही पक्षों की ओप से दलीलें पेश की गई थी। लेकिन कोर्ट ने उस वक्त इस मामले पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया था। कोर्ट ने मामले को जिला अदालत में भेज दिया था। शीर्ष अदालत ने न्यायाधीश के अनुभव को तरहीज देते हुए मामले की सुनवाई जिला अदालत में करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, अब तक जिला अदालत में हुई सुनवाई को लेकर मामले के संदर्भ में कोई भी अंतिम फैसला सामने नहीं आ पाया है। ऐसे में देखना होगा कि कल यानी की बुधवार को होने वाली सुनवाई के दौरान कोर्ट का क्या कुछ फैसला सामने आता है। आपको बता दें कि ज्ञानवापी मामले को लेकर पांच महिला याचिकाकर्ताओं की कोर्ट में याचिका दाखिल कर मस्जिद में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा करने की इजाजत मांगी गई थी।

जिसके बाद उपरोक्त मामले को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई। विगत दिनों कोर्ट के निर्देश पर मस्जिद का सर्वे भी हुआ था। दावा है कि सर्वे के दौरान कई ऐसे साक्ष्य संग्रहित किए गए हैं, जिससे वहां कालांतर में मंदिर होने की पुष्टि होती है। लेकिन मुस्लिम पक्षों की ओर लगातार इस सर्वे का विरोध किया जा रहा है। यही नहीं, मुस्लिम पक्षों का तो यहां तक कहना है कि इस मामले की कोर्ट में सुनवाई ही नहीं होनी चाहिए थी।

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