Jul 02 2022 / 1:12 AM

सोनिया गांधी के घर कांग्रेस के बड़े नेताओं की मीटिंग, प्रशांत किशोर को पार्टी में शामिल करने पर मंथन





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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक हो रही है। इस मंथन बैठक में कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, अंबिका सोनी और कुछ अन्य नेता उपस्थित हैं।

सूत्रों के मुताबिक इस ‘चिंतन शिवर’, में खास तौर से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को कांग्रेस पार्टी में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, सदस्यता अभियान और कुछ अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अभी पार्टी की ओर से इसकी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पीके के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि मार्च में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। अब शनिवार की कांग्रेस की बैठक में पीके के शामिल होने के बाद इस चर्चा को एक बार फिर से बल मिला है कि पीके कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं। बताया जाता है कि इससे पहले 2020 में भी प्रशांत किशोर कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन कुछ असहमति की वजह से यह योजना अमल में नहीं आई।

सूत्रों के मुताबिक गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रशांत किशोर को अपनी बड़ी योजना में शामिल करने पर विचार कर रही है। बताया जाता है कि किशोर उद्योगपति, लेउवा पाटीदार नेता नरेश पटेल को गुजरात के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने की योजना बनाने वालों में शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि अभी हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद समीक्षा बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी में फिर से जान फूंकने के लिए हर संभव उपाय करने का वादा किया था। 5 अप्रैल को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस का पुनरुद्धार सिर्फ हमारे लिए महत्व का विषय नहीं है, बल्कि हमारे लोकतंत्र व समाज के लिए भी जरूरी है।

सीपीपी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सोनिया गांधी ने कहा था कि हम भाजपा को सदियों से हमारे विविधतापूर्ण समाज को बनाए रखने और समृद्ध करने वाले सौहार्द और सद्भाव के बंधन को कमजोर करने नहीं देंगे। उन्होंने कहा था कि भाजपा का विभाजनकारी एजेंडा राज्यों में राजनीतिक विमर्श का नियमित हिस्सा रहा है। वह अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है।

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